जिनके स्पर्श मात्र से पाषाण मूर्ति अहिल्या जीवंत हो गईं ।
जिनका उल्टे नाम जपने मात्र से रत्नाकर जैसे ख़ूँख़ार डकैत भी आदिकवि वाल्मीकि बन गए ।
जिनके कृपा मात्र से गयासुर नामक असुर का मृत शरीर भी गया तीर्थ क्षेत्र में पितरों को तारने योग्य हो गया।
जिनके नाम (राम) का मन्त्र देकर स्वयं विश्वेश्वर शंभु महादेव काशी में प्राणियो को मुक्ति प्रदान करते हैं ।
जिसके नाम के प्राप्त होने से ही एक योद्धा बर्बरीक खाटू श्याम बनकर स्वयं भगवान जितने पूज्य हो गए।
जिनके नाम लिखने मात्र से विशाल महासागर में पत्थर भी तैरने लग गए ।
जिनसे मृत्यु प्राप्त करके पूतना, केशी , तृणावर्त, कालियानाग आदि जैसे विभत्स असुर भी मुक्तिभाव को प्राप्त कर गए।
जिनके चरणों को धोकर गंगा विष्णुपादोदकी कहलाई और पापनाशिनी एवं परम पवित्र हो गईं।
वे श्रीभगवान स्वयं कितने ही पवित्र होंगे ? सोचो तो ज़रा

अत्यन्त सुन्दर ✨🙏
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